मन भर कर इठला भी ना पाई 

बारिश और वाे भी घनी रात में, एक अलग ही रंग हाेता है तब! पर क्या करते! बातें बहुत थी करने काे, कम्बख्त आखिर माैके पर उसका माेबाइल बैलेंस लाे हाे गया और मेरा माेबाइल बैटरी बैकअप फ्लाप हाे गया !

बीच में ही विराम लगाना पड़ा. 

बाताें का पिटारा बंद करना पड़ा यूं अचानक. 

मन भर कर इठला भी ना पाई फाेन रखने से पहले!

आधे पेट साेये हम दाेंनाे ❤